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1 thought on ““सानंद स्वामी के बलिदान के बाद अब एक साध्वी का गंगा सत्याग्रह में बैठना देश के लिए लज्जाजनक है”

  1. गंगा मैया की सुरक्षा के लिए एक और साधक ने अपने प्राणों की बाजी लगा दी है। मां गंगा की निर्मलता, अविरलता, सफाई, प्रदूषण मुक्ति का आश्वासन सरकार भी बार बार दे रही है मगर उस तरफ कदम बढ़ते नहीं नजर आ रहे हैं। जन थन खूब खर्च करने की बात कही जा रही है। उससे गंगा मैया का भला होता नहीं दिख रहा है, बल्कि गंगा को बांधा जा रहा है। घेरा जा रहा है। घाटों के नाम पर बड़ी बड़ी सीढ़ियों का जाल मां की गोद में किया जा रहा है। उसके शरीर को रौंदा जा रहा है। खनन तक को नहीं रोका जा सका है। मां को घाव पर घाव दिए जा रहे हैं।
    नदी में नीर हो, नाद हो, नाच हो, नमन हो, निर्मलता, अविरलता हो।
    इसके लिए मातृ स्वरुपा, मातृशक्ति साधिका पद्मावती ने मातृ सदन में मातृ गंगा के लिए मातृत्व बचाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने को मजबूर हुई हैं। हम उनकी भावनाओं की कद्र करते हैं। मां गंगा को बचाना जरूरी है। साथ ही हमारी मान्यता है कि गंगा मैया के साधक, साधिका, मां गंगा के लाडले- लाडली बेटे- बिटिया लम्बे समय तक मां की गोद में फले-फूले, आगे बढ़े। मां की सेवा कर पुण्य प्राप्त करते हुए जीवन भर मां गंगा की गोद को हरी भरी रखें। मां गंगा के लिए जीने वाले लोगों की आवश्यकता है जो लम्बे समय तक तप, तपस्या करते हुए मां की सेवा में लगे रहें।
    हम नागरिकों से अपील करते हैं कि मां गंगा की सेवा के लिए अपना सर्वस्व समर्पण करने वाले साधकों का साथ दें, उनकी आवाज में आवाज मिलाएं।
    सादर जय जगत।
    रमेश चंद शर्मा, बा बापू 150

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