फादर्स डे ( पितृ दिवस) 21 जून पर विशेष -ज्ञानेन्द्र रावत मुझे अपने पिता को याद करने के लिए किसी खास दिन की जरूरत नहीं पड़ती। भले वह अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनको गोलोकवासी हुए 41 बरस हो गये लेकिन मैं उन्हें सिर्फ फादर्स डे पर हीContinue Reading

शुक्रवार विशेष ये लम्हा गुज़र जायेगा – आभा शर्मा ये लम्हा गुज़र जायेगा वक़्त कब रूका है ये भी गुज़र जायेगा बर्फ़ सा पिघल जायेगा पानी सा बह जाएगा धुंध के बादल हैं पल दो पल में छट जाएंगे बरसेगी रहमत धूप खिल जाएगी मिलेंगी नई राहें नए दरवाज़े खुलContinue Reading

रविवार पर विशेष रमेश चंद शर्मा* बचपन में पंजाब (हरियाणा) का गांव। सड़क नहीं, बिजली नहीं, अखबार नहीं, डाकघर नहीं, स्कूल का भवन नहीं, नल नहीं, बाजार नहीं, अस्पताल नहीं, पुलिस थाना नहीं, फोन नहीं, टीवी नहीं, रेडियो नहीं, मोटर वाहन नहीं, ट्रक नहीं, ट्रक्टर नहीं, मोटरसाइकिल नहीं। गीने चुनेंContinue Reading

सप्ताहांत विशेष रमेश चंद शर्मा*   अपना सौभाग्य समझता हूं कि मेरा जन्म एक भरे-पूरे परिवार (कुनबे) में हवेली में हुआ। हमें हवेली वाले या हुरली वाले के नाम से पहचाना जाता। गांव के आस-पड़ोस में भी एक अलग ही पहचान थी। आज भी हवेली तो खड़ी हुई है। हवेलीContinue Reading