डिनोटिफिकेशन के बाद चंबल पर मंथन
अभ्यारण्य कानून हटने के बाद घड़ियालों की सुरक्षा पर चिंता
कोटा: राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य की अधिसूचना से चंबल नदी के एक हिस्से को हटाए जाने के बाद नदी की पारिस्थितिकी, जल गुणवत्ता और जैव विविधता को लेकर गंभीर चिंताएँ उठ रही हैं।
राजस्थान सरकार ने 23 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर हैंगिंग ब्रिज से कोटा बैराज तक के लगभग सात सौ बत्तीस हेक्टेयर क्षेत्र को अभ्यारण्य की सीमा से बाहर रखा। सरकार ने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से शहरी और कृषि उपयोग में है और सीमा संशोधन प्रशासनिक स्पष्टता के लिए किया गया।
राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य से चंबल नदी के एक हिस्से को हटाए जाने के बाद नदी और उसके तटीय पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन गई है। राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत 1978 में अधिसूचित किया गया था। इसका उद्देश्य चंबल नदी और उसके किनारे बसे तटीय क्षेत्रों में संकटग्रस्त प्रजातियों, विशेषकर घड़ियाल, मगरमच्छ और अन्य जलीय जीवन का संरक्षण करना था। घड़ियाल गहरे, शांत और स्वच्छ जल प्रवाह वाले खंडों में रहता है और रेतीले किनारों पर अंडे देता है। इसके आवास में हस्तक्षेप नदी की पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
इसी पृष्ठभूमि में छह जनवरी को कोटा में चंबल संसद की बैठक आयोजित हुई, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया कि डिनोटिफाई किए गए क्षेत्र में किसी भी प्रकार के गंदे नालों का प्रवाह न हो और नदी पूर्णतया प्रदूषण मुक्त रहे।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि अभ्यारण्य से बाहर किए गए हिस्से में व्यावसायिक गतिविधियों और भूमि उपयोग के दबाव को नियंत्रित किया जाए ताकि घड़ियाल और अन्य जलीय जीव सुरक्षित रहें। चंबल संसद ने चिंता जताई कि अपस्ट्रीम क्षेत्र, जो कोटा शहर का मुख्य पेयजल स्रोत भी है, यदि प्रदूषित नालों और सीवेज प्रवाह के अधीन रहेगा तो स्वास्थ्य और जल आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
चंबल संसद एक नागरिक-आधारित मंच है, जिसकी स्थापना वर्ष 2012 में हुई। इसमें समाजसेवी, पर्यावरण कार्यकर्ता, वन्यजीव विशेषज्ञ, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हैं। मंच समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन भेजता रहा है, सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाता है और नदी के संरक्षण के लिए निरंतर निगरानी करता है। प्रमुख सदस्य अध्यक्ष कुंज बिहारी नंदवाना और संयोजक बृजेश विजयवर्गीय हैं।
बैठक में वन्यजीव विशेषज्ञ डा. कृष्णेन्द्र सिंह ने कहा कि घड़ियाल नदी की पारिस्थितिकी का संकेतक जीव है और इसके आवास में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पूरे जलीय तंत्र पर प्रभाव डाल सकता है। संरक्षक समाजसेवी जी.डी. पटेल, यज्ञदत्त हाडा, डा अमित सिंह राठौड़, उपाध्यक्ष अनिता चौहान, डा. विनीत महोबिया, लोक अधिकार मंच के अध्यक्ष शंकर आसकंदानी, इंटेक सदस्य अनिल शर्मा और ज्योति सक्सेना ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि डिनोटिफाई किए गए हिस्से में निगरानी और संरक्षण के प्रावधान सख्ती से लागू होने चाहिए और किसी भी प्रकार का अवैध खनन या तटीय दबाव नदी और उसके जीवों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर डिनोटिफाई किए गए क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण, जल प्रबंधन, वन्यजीव सुरक्षा और सीवेज शोधन संयंत्रों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि शहरी विकास और पर्यटन परियोजनाओं में चंबल की जल गुणवत्ता और जैव विविधता को व्यावहारिक मानक के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। चंबल संसद ने संकेत दिया कि वह राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य से कानूनी मुक्ति के बाद भी चंबल नदी के प्रबंधन और संरक्षण के लिए सार्वजनिक संवाद और प्रशासनिक निगरानी जारी रखेगी।
– ग्लोबल बिहारी ब्यूरो
