शंकराचार्य ने की नई संगठनात्मक संरचना की शुरुआत
वाराणसी: वाराणसी स्थित ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य सचिवालय, श्रीविद्यामठ, केदारघाट में आज सोमवार को उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ नामक संगठन के गठन की प्रक्रिया आरम्भ करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य गौ, ब्राह्मण जैसे सनातन प्रतीकों तथा समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा और सहायता बताया गया है। इस पहल के साथ ही संगठन के लिए पंजीकरण भी शुरू कर दिया गया है।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में वर्तमान समय को संक्रमण काल बताते हुए कहा कि जब धार्मिक प्रतीकों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार की घटनाएँ सामने आ रही हैं, तब केवल शास्त्र-चर्चा पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। उन्होंने भगवान परशुराम के शस्त्र धारण से जुड़े संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में भयमुक्त वातावरण स्थापित करना आवश्यक है, ताकि लोग बिना संकोच अन्याय का प्रतिकार कर सकें और सत्य के पक्ष में खड़े हो सकें। उन्होंने इस प्रस्तावित संगठन को प्रत्येक सनातनी के लिए ‘अभिभावक’ की भूमिका निभाने वाला बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य समाज में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना को मजबूत करना है।
घोषणा के अनुसार, ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ का संचालन प्राचीन भारतीय सैन्य परंपराओं से प्रेरित नौ-स्तरीय पदानुक्रम के आधार पर किया जाएगा। इसमें पत्तिपाल से लेकर महासेनापति तक विभिन्न स्तरों के पद निर्धारित किए गए हैं, जिनके अंतर्गत अलग-अलग जिम्मेदारियाँ और प्रोटोकॉल तय किए जाएंगे। संगठन के शीर्ष पर एक परमाध्यक्ष होगा, जिसके अधीन सर्वाध्यक्ष, सह सर्वाध्यक्ष और संयुक्त सर्वाध्यक्ष के रूप में तीन पद होंगे, जिनमें पुरुष, महिला और तृतीय लिंग के प्रतिनिधित्व का प्रावधान रखा गया है।
संरचना के तहत संगठन को चार प्रमुख अंगों—मनबल, तनबल, धनबल और जनबल—में विभाजित किया गया है, जिनके संचालन के लिए अलग-अलग अंगाध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे। प्रत्येक अंग के अंतर्गत पांच-पांच विभागों के माध्यम से कुल बीस विभाग कार्य करेंगे। मनबल में संत, विद्वान, पुरोहित, विधिक सहायता से जुड़े लोग और मीडिया से जुड़े व्यक्ति शामिल होंगे, जबकि तनबल के अंतर्गत शारीरिक प्रशिक्षण और विभिन्न शस्त्र संचालन से संबंधित इकाइयाँ होंगी। जनबल के तहत विभिन्न श्रेणियों के स्वयंसेवकों को जोड़ा जाएगा, वहीं धनबल के माध्यम से दान और संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी, जिसे संगठन के संचालन का आधार बताया गया है।
बताया गया कि संगठन की सबसे छोटी इकाई ‘पत्ति’ होगी, जिसका नेतृत्व पत्तिपाल करेगा और इसमें लगभग दस सदस्यों की टीम होगी, जिनमें मनबल, तनबल और जनबल के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इसी क्रम में हाल ही में वाराणसी में शंकराचार्य के प्रवचनों पर आधारित पुस्तक ‘अनासक्तिः दुख से निवृत्ति का सूत्र’ का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक उनके प्रवचनों का संकलन है, जिसका संपादन बटुक योगेश नाथ त्रिपाठी ने किया है। इस अवसर पर शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें इस बात से विशेष प्रसन्नता है कि उनके ही संस्थान के पूर्व छात्र ने इस कार्य को संपादित किया है। उन्होंने संपादक को आशीर्वाद देते हुए भविष्य में ऐसे अन्य ग्रंथों के संपादन के लिए प्रेरित किया।
विमोचन समारोह में प्रकाशन विभाग से जुड़े पदाधिकारियों और अन्य सहयोगियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय द्वारा साझा की गई।
– ग्लोबल बिहारी ब्यूरो
