– अनिल शर्मा*
नदी, नारी और नीर के संदेश के साथ यमुना संरक्षण के लिए जल सहेलियों की एक माह की यात्रा आरंभ
पचनदा (जालौन): जहाँ नदियाँ मिलती हैं, वहाँ केवल जलधाराएँ नहीं जुड़तीं, बल्कि जीवन की नई संभावनाएँ आकार लेती हैं। पचनद संगम पर यही भाव उस समय स्पष्ट दिखाई दिया, जब जल सहेलियों ने अविरल निर्मल यमुना यात्रा का शुभारंभ किया। यह यात्रा एक माह तक चलेगी और यमुना के किनारे बसे समाज को नदी से जोड़ने का प्रयास करेगी।

संगम तट पर उपस्थित जनसमूह के बीच यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नदी और समाज के रिश्ते को फिर से जीवंत करने की पहल के रूप में उभरी। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने नदियों के स्वभाव और चरित्र की बात करते हुए कहा कि उन्हें उनके प्राकृतिक प्रवाह के अनुसार बहने देना ही संतुलन का आधार है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए जीवन समर्पित करने वाली जल सहेलियों के प्रयासों को समाज के लिए प्रेरक बताया और कहा कि सरकार नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए कार्य कर रही है, पर अब समाज को भी इससे जुड़ना होगा। नीर, नारी और नदी के एक होने से ही प्रकृति का संतुलन संभव है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जल पुरुष के नाम से विख्यात डॉ. राजेंद्र सिंह ने इस यात्रा को सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नदियों की रक्षा केवल सरकार या किसी एक वर्ग का दायित्व नहीं है, बल्कि पूरे समाज की है। आज यह जिम्मेदारी जल सहेलियों ने अपने कंधों पर उठाई है और वे पचनद से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर यह संदेश दे रही हैं कि नदियाँ जीवन की आधारशिला हैं। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि भारतीय संस्कृति में नल, नदी और नारी का सम्मान किया जाता था, पर आज गाँवों और शहरों का गंदा पानी सीधे नदियों में जा रहा है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने समाज और विद्यार्थियों से नदियों को स्वच्छ और जीवंत रखने के लिए ठोस कदम उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि नदियों को खतरा केवल शहरी प्रदूषण से नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती रासायनिक खेती और उससे उत्पन्न प्रदूषण से भी है। इसके प्रति जागरूकता आवश्यक है, ताकि जीवन का चक्र निरंतर बना रह सके।
जालौन के जिलाधिकारी राजेश पांडेय ने जल सहेलियों के इस संकल्प को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि पचनद से दिल्ली तक की यह पदयात्रा जनचेतना को नई दिशा देगी। उन्होंने सुझाव दिया कि इस अभियान में शैक्षिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि युवा वर्ग नदी संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा सके।
परमार्थ संस्थान के अध्यक्ष प्रो. राणा प्रताप सिंह ने जल और पर्यावरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जल के बिना न स्वस्थ समाज की कल्पना की जा सकती है और न ही सुरक्षित भविष्य की। इसी दिशा में जल सहेलियाँ निरंतर निष्ठा के साथ कार्य कर रही हैं।
जल सहेली संगठन के संस्थापक संजय सिंह ने इस यात्रा को केवल पदयात्रा नहीं, बल्कि जन-जागरण की संचेतना यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान यमुना को पुनः अविरल और निर्मल बनाने के संकल्प का प्रतीक है। हर जिले से जुड़ी जल सहेलियाँ यह संदेश दे रही हैं कि नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और आत्मा है।

यमुना यात्रा का उद्देश्य समाज को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक करना, यमुना में हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना, स्थानीय समुदायों को नदी से पुनः जोड़ना और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व जीवंत यमुना का निर्माण करना है। साध्वी सरिता देवी ने इसे अत्यंत प्रेरणादायी कार्य बताया।
जल सहेली संगठन की अध्यक्ष पुष्पा ने कहा कि जल सहेलियाँ आज देश में जल संरक्षण की एक सशक्त जनआंदोलनकारी शक्ति बनकर उभरी हैं। गाँव-गाँव और घर-घर जाकर जल बचाने, जल स्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का जो कार्य वे कर रही हैं, उसी को यमुना यात्रा के माध्यम से और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस यात्रा का उद्देश्य यमुना को अविरल और निर्मल बनाने के साथ-साथ समाज को नदी के प्रति उसके दायित्व का बोध कराना है।
इस अवसर पर श्रीमती कामना भदौरिया (जिला पंचायत अध्यक्ष, भिंड), विपुल शिव सागर (बेसिक शिक्षा अधिकारी, झाँसी), रवि शंकर तिवारी, यमुना मंत्री प्रतिनिधि अरविंद सिंह चौहान, अजीत सिंह सेंगर, ब्लॉक प्रमुख रामपुरा (जालौन), डॉ. दुर्गेश कुमार (पुलिस अधीक्षक, जालौन), अनुपमा लोदी (सदस्य, राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश), मूलचंद निरंजन (विधायक माधौगढ़), भाजपा के वरिष्ठ नेता शीतल सिंह सेंगर, करन सिंह, कमललिखधारी, अनिल सिंह, निदेशक वरुण प्रताप सिंह सहित 2000 से अधिक जल सहेलियाँ उपस्थित रहीं।
*वरिष्ठ पत्रकार
