– अनिल शर्मा*
पदयात्रा से नीति तक पहुंचीं यमुना की आवाज़ें
यमुना यात्रा के सुझावों पर उच्चस्तरीय चर्चा
नई दिल्ली: नमामि गंगे के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल से जल सहेलियों ने मुलाकात कर अपनी लगभग 500 किलोमीटर लंबी यमुना पदयात्रा के दौरान संकलित अनुभवों और जनसुझावों को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया।
नई दिल्ली स्थित ध्यानचंद स्टेडियम परिसर में नमामि गंगे के कार्यालय में हुई इस बैठक में नदी संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर गंभीर और केंद्रित चर्चा हुई, जिसमें जमीनी अनुभवों को नीति-स्तर तक पहुंचाने का प्रयास स्पष्ट दिखा। जल सहेलियों ने यमुना यात्रा के दौरान प्राप्त सुझावों और अनुभवों पर उनके कार्यालय में विस्तार से संवाद किया।
कंजौसा पचनंद से दिल्ली के वासुदेव घाट तक की इस यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर आयोजित ‘यमुना चौपालों’ में स्थानीय समुदाय, किसानों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। इन चौपालों में सामने आए मुद्दों, चिंताओं और सुझावों को जल सहेलियों ने एक सुव्यवस्थित दस्तावेज़ के रूप में तैयार कर महानिदेशक के समक्ष रखा और उस पर विस्तृत चर्चा की।
प्रस्तुत सिफारिशों में यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने, औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण पर कड़े नियंत्रण, नदी किनारे अवैध अतिक्रमण हटाने, जल संचयन संरचनाओं का विस्तार करने तथा दोनों तटों पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही आगरा, मथुरा और बटेश्वर जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यमुना जल की गिरती गुणवत्ता और उसके सामाजिक प्रभावों की ओर भी विशेष ध्यान आकृष्ट किया गया।
जल सहेलियों ने यह भी रेखांकित किया कि कई स्थानों पर नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगातार प्रभावित हो रहा है। इसका असर केवल जल गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय आजीविका, पशुपालन और कृषि गतिविधियों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने समुदाय आधारित जल प्रबंधन को मजबूत करने और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि नदी संरक्षण को एक व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।
महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने जल सहेलियों द्वारा प्रस्तुत सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जमीनी पहलें नदी संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि इनके माध्यम से वास्तविक समस्याओं और संभावित समाधानों की स्पष्ट समझ विकसित होती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रस्तुत सिफारिशों का विभागीय स्तर पर परीक्षण कर उन्हें लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने आगे बताया कि नमामि गंगे के अंतर्गत यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए बहु-स्तरीय रणनीति पर कार्य जारी है, जिसमें समुदाय की भागीदारी को और अधिक सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जल सहेलियों जैसे संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर भविष्य में संयुक्त रूप से अभियान चलाने पर भी सहमति बनी, जिससे जमीनी स्तर की पहल और संस्थागत प्रयासों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी सामने आया कि यमुना संरक्षण के लिए गठित टास्क फोर्स में जल सहेली संगठन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसी क्रम में जालौन निवासी और जल सहेली संगठन के संस्थापक डॉ. संजय सिंह को टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की बात कही गई, ताकि जमीनी अनुभवों और सामुदायिक दृष्टिकोण को नीति निर्माण में प्रभावी रूप से स्थान मिल सके।
*वरिष्ठ पत्रकार
