प्रयागराज प्रकरण: संगम स्नान रोकने पर संत समाज में उबाल जारी
शंकराचार्य के समर्थन में हिंगलाज सेना सक्रिय, सरकार को दिया अल्टीमेटम
प्रयागराज: ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा स्थापित और संरक्षित हिंगलाज सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री लक्ष्मीमणि शास्त्री ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगकर उन्हें संगम स्नान के लिए नहीं मनाया, तो संगठन “कठोर कदम” उठाने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य को संगम स्नान से रोके जाने की घटना को सर्वथा अनुचित और शास्त्र-विरुद्ध बताते हुए कहा कि इससे पूरे संत समाज में आक्रोश व्याप्त है।
शास्त्री ने कहा कि भारत में संत समाज भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक रहा है और संतों की मर्यादा बनाए रखना सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगभग 200 अनुयायियों के साथ पालकी में सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनका मार्ग रोक दिया। इस कदम को शंकराचार्य के अनुनाईयों द्वारा संत परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया जा रहा है।

लक्ष्मीमणि शास्त्री ने कहा कि ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा स्थापित और संरक्षित हिंगलाज सेना संत समाज की गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या से लेकर वसंत पंचमी तक धरनारत शंकराचार्य को संगम स्नान न करने देना सर्वथा अनुचित है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे अविलंब शंकराचार्य से क्षमा याचना कर उन्हें विधिवत स्नान के लिए आमंत्रित करें। अन्यथा संगठन कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। इस संबंध में जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी।
इस चेतावनी की पृष्ठभूमि में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना 18 जनवरी, 2026 से लगातार प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में जारी है। मौनी अमावस्या की घटना के बाद उन्होंने संगम स्नान से इनकार कर दिया और अपने शिविर के बाहर बैठकर विरोध दर्ज कराया। वसंत पंचमी के दिन भी उन्होंने स्नान नहीं किया और प्रशासन से सम्मानजनक व्यवस्था तथा संत परंपराओं के अनुरूप व्यवहार की मांग दोहराई।
धरने के दौरान कई बार तनावपूर्ण हालात बने। शंकराचार्य के शिविर के पास नारेबाजी और हंगामे की घटनाएं सामने आईं। एक घटना में कुछ लोगों के लाठी-डंडों के साथ शिविर की ओर बढ़ने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद समर्थकों ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शंकराचार्य की सुरक्षा को देखते हुए उनके शिविर के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और पुलिस निगरानी बढ़ाई गई।
लगातार धरने और तनावपूर्ण माहौल के बीच शंकराचार्य के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई गई है। उनके सहयोगियों के अनुसार लंबे समय तक धरने पर बैठे रहने से उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शंकराचार्य के पद और परंपरा का अपमान किया गया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेताओं ने भी उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए इसे सनातन परंपराओं के प्रति असम्मान बताया।
विवाद केवल प्रशासन और संत समाज के बीच तक सीमित नहीं रहा। कुछ अन्य धार्मिक नेताओं के साथ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच सार्वजनिक बयानबाजी भी सामने आई, जिससे प्रकरण और व्यापक हो गया है।
प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मार्ग रोका गया था। वहीं संत समाज इसे धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है।
फिलहाल प्रयागराज में संत समाज और प्रशासन के बीच तनाव बना हुआ है। हिंगलाज सेना की चेतावनी के बाद विवाद और गंभीर हो गया है। अब सभी की निगाहें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि संवाद और समाधान के माध्यम से इस संवेदनशील धार्मिक और सामाजिक विवाद को किस प्रकार सुलझाया जाता है।
– ग्लोबल बिहारी ब्यूरो
