चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह,पूर्व राज्य मंत्री मनोज राय धूपचंडी ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ शंकराचार्य जी का दर्शन कर लिया आशीर्वाद और दिया चल रहे धर्मयुद्ध में अपना समर्थन।
पोक्सो केस में शंकराचार्य पर साजिश का दावा
जांच के बीच ‘धर्मयुद्ध’ की गूंज
वाराणसी: प्रयागराज में बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) के अंतर्गत दर्ज प्रकरण ने आज वाराणसी में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब चंदौली से समाजवादी पार्टी सांसद वीरेंद्र सिंह, पूर्व राज्य मंत्री मनोज राय धूपचंडी तथा एक प्रतिनिधिमंडल के साथ वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ पहुँचे और ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भेंट कर सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन व्यक्त किया। यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब प्रयागराज की विशेष बाल यौन अपराध अदालत के आदेश पर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और पुलिस जांच प्रारंभिक चरण में है।

आज ही मठ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में एक अलग दावा भी सामने आया। शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने आरोप लगाया कि हिस्ट्रीशीटर बताए गए आशुतोष पाण्डेय ने उन्हें आर्थिक प्रलोभन देकर शंकराचार्य पर एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण का आरोप लगाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया।

विज्ञप्ति के अनुसार प्रस्ताव अस्वीकार करने पर कथित रूप से उन्हें धमकी दी गई। दीक्षित ने इस आशय का हस्ताक्षरित बयान शंकराचार्य को सौंपने की बात कही है। इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है और यह स्पष्ट नहीं है कि इस संबंध में कोई पृथक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं।
प्रयागराज की विशेष अदालत ने फरवरी 2026 में एक प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद संबंधित थाने को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। शिकायत में दो नाबालिगों के साथ कथित यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने कथित पीड़ितों के बयान दर्ज किए जाने और प्रस्तुत सामग्री की समीक्षा के पश्चात प्रथम दृष्टया मामला दर्ज करने का आदेश पारित किया। इसके बाद पुलिस ने बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012 तथा भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत मामला पंजीकृत किया। इन प्रावधानों में कठोर कारावास तक का दंड निर्धारित है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार जांच जारी है; अब तक गिरफ्तारी या आरोपपत्र दाखिल होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
मूल शिकायत एक अन्य धार्मिक पदाधिकारी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी। अदालत के आदेश के बाद से यह मामला विधिक प्रक्रिया के अधीन है। शंकराचार्य ने आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है और कहा है कि सत्य न्यायिक परीक्षण से स्पष्ट होगा।
इसी संवेदनशील पृष्ठभूमि में सांसद की उपस्थिति ने प्रकरण को व्यापक राजनीतिक विमर्श में ला दिया है। मठ परिसर में बातचीत के दौरान सांसद ने इस विवाद को “धर्मयुद्ध” की संज्ञा दी और कहा कि वे शंकराचार्य के साथ खड़े हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि प्राथमिकी दर्ज होने के तुरंत बाद इस प्रकार का सार्वजनिक समर्थन प्रतीकात्मक महत्व रखता है। यह भेंट ऐसे समय में हुई जब प्राथमिकी दर्ज हो चुकी थी और पुलिस जांच प्रारंभिक चरण में थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समय-चयन ने इस मुलाकात को प्रतीकात्मक महत्व दे दिया है। समर्थकों के अनुसार, यह यात्रा आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रति सम्मान और नैतिक समर्थन का संकेत थी। वहीं आलोचकों का कहना है कि पोक्सो जैसे संवेदनशील मामले में, जहां आरोप गंभीर प्रकृति के हों, किसी जनप्रतिनिधि का सार्वजनिक समर्थन न्यायिक प्रक्रिया से पूर्व पक्ष ग्रहण करने की धारणा उत्पन्न कर सकता है।बाल यौन अपराध जैसे गंभीर आरोपों की जांच के बीच इस प्रकार की राजनीतिक अभिव्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न खड़े कर सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों में जांच प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील होती है और पीड़ितों की पहचान तथा अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। ऐसे मामलों में सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ अक्सर समानांतर विमर्श को जन्म देती हैं, किंतु अंतिम निर्णय साक्ष्यों, जांच और न्यायालयीन परीक्षण पर ही आधारित होता है।
वर्तमान स्थिति में यह प्रकरण न्यायिक जांच, साजिश के दावों और राजनीतिक समर्थन—तीनों स्तरों पर विकसित हो रहा है। आगे की दिशा पुलिस जांच, संभावित कानूनी कार्रवाई और न्यायालय की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगी।
– ग्लोबल बिहारी ब्यूरो
