शिवाजी जयंती से शुरू होगी शंकराचार्य की यात्रा
वाराणसी: गौमाता को “राज्यमाता” घोषित करने और उत्तर प्रदेश में पूर्ण रूप से गोहत्या बंद कराने की मांग के संदर्भ में प्रस्तावित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में काशी से लखनऊ तक एक यात्रा आयोजित की जाएगी, जिसका समापन लखनऊ में प्रस्तावित “गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद” कार्यक्रम के साथ होगा। इस क्रम में वाराणसी के शंकराचार्य घाट से यात्रा के पहले संकल्प कार्यक्रम और उसके बाद विभिन्न जिलों में सभाओं का आयोजन प्रस्तावित किया गया है।
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि गौमाता को राज्यमाता घोषित करने तथा राज्य में पूर्णतया गोहत्या बंद कराने की मांग को लेकर पूर्व में 40 दिनों की समयावधि दी गई थी। इस अवधि के पूर्ण होने के बाद गोप्रतिष्ठा से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ समाचारपत्रों में गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद कार्यक्रम की तिथि भूलवश अलग ढंग से प्रकाशित हो जाने के कारण लोगों में संशय उत्पन्न हुआ था। इसे स्पष्ट करने के लिए कार्यक्रम की तिथि और विस्तृत विवरण पुनः साझा किया गया है।
कार्यक्रमों की शुरुआत वाराणसी में ‘संकल्प दिवस’ के साथ होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण तृतीया के दिन शंकराचार्य घाट पर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जाएगी। इस अवसर पर गंगा तट पर आयोजित कार्यक्रम में गंगापूजन के साथ गोप्रतिष्ठा के लिए वैचारिक धर्मयुद्ध शंखनाद का संकल्प लिया जाएगा। आयोजन में लघु नाटिका, छत्रपति शिवाजी की बिरुदावली का वाचन तथा विभिन्न वक्ताओं के उद्बोधन का कार्यक्रम रखा गया है। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आशीर्वचन भी होंगे।
इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगली सुबह श्री विद्या मठ से यात्रा का प्रस्थान प्रस्तावित है। प्रस्थान से पूर्व वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में संकटमोचन हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया जाएगा और यात्रा के सफल संचालन के लिए प्रार्थना की जाएगी।
काशी से निकलने के बाद यह यात्रा क्रमशः पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के विभिन्न नगरों से होकर आगे बढ़ेगी। पहले दिन जौनपुर और सुल्तानपुर में सभाएँ आयोजित करने के बाद यात्रा रायबरेली पहुँचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम का कार्यक्रम रहेगा। इसके अगले दिन रायबरेली से आगे बढ़ते हुए मोहनलालगंज, लालगंज और अचलगंज में सभाओं का आयोजन प्रस्तावित है और यात्रा उन्नाव पहुँचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम किया जाएगा। इसके बाद उन्नाव से यात्रा बांगरमऊ और बघौली में सभाओं के बाद नैमिषारण्य पहुँचेगी, जहाँ सभा और रात्रि विश्राम का कार्यक्रम रखा गया है।
यात्रा का अगला चरण नैमिषारण्य से आरंभ होकर सिधौली और इटौंजा से गुजरते हुए लखनऊ की सीमा तक पहुँचेगा, जहाँ अगले दिन आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम से पहले रात्रि विश्राम किया जाएगा।
लखनऊ में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में मंगलाचरण के साथ अनुष्ठान आरंभ होगा। कार्यक्रम के दौरान गोमय से गणेश पूजन और गो-ध्वज प्रतिष्ठा जैसे अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही विद्वानों, संतों और गोभक्तों के संबोधन का कार्यक्रम भी रखा गया है। इसी कार्यक्रम के दौरान “गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद” की घोषणा की जाएगी।
संजय पाण्डेय के अनुसार काशी से प्रारंभ होकर विभिन्न नगरों से गुजरती यह यात्रा लखनऊ में प्रस्तावित कार्यक्रम के साथ पूर्ण होगी, जहाँ इस अभियान से जुड़े विषयों और प्रस्तावों को सार्वजनिक रूप से रखा जाएगा।
– ग्लोबल बिहारी ब्यूरो
