Latest News | Food | News in Hindi | Diaspora | Titbits | Sports | Today's Pick | Artist's Gallery | Nature | Finance | Film | Entertainment | GB TV | Podcast

January 21, 2026

3 thoughts on “रविवारीय: तनाव और तनाव प्रबंधन

  1. लेख-समीक्षा (Review)
    यह लेख अत्यंत सरल, सहज और व्यावहारिक भाषा में तनाव जैसे जटिल विषय को समझाने का सफल प्रयास करता है। लेखक ने तनाव को किसी बाहरी “बीमारी” के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसे हमारी मानसिक धारणा और दृष्टिकोण से जोड़ा है, जो लेख की सबसे बड़ी विशेषता है। लेख की शुरुआत ही आम जन-मानस की उस प्रवृत्ति पर प्रहार करती है जहाँ लोग “बहुत टेंशन है” कहकर बिना कारण खोजे उसे जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मान लेते हैं। यह पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
    लेख में काम के दबाव और तनाव के बीच स्पष्ट अंतर बताया गया है, जो इसे और अधिक व्यावहारिक बनाता है। समय-प्रबंधन और प्राथमिकता निर्धारण पर दिया गया संदेश आज के व्यस्त जीवन में अत्यंत प्रासंगिक है। “वक़्त नहीं है” जैसी आम शिकायत को लेखक ने तर्कपूर्ण ढंग से खारिज किया है, जिससे पाठक अपनी दिनचर्या पर पुनर्विचार करने को मजबूर होता है।
    लेख का सबसे सशक्त पक्ष है—श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का तनाव प्रबंधन से सुंदर समन्वय। निष्काम कर्म, समभाव, आत्म-नियंत्रण और फल-आसक्ति के त्याग जैसे सिद्धांतों को लेखक ने केवल दार्शनिक उपदेश की तरह नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जाने योग्य उपायों के रूप में प्रस्तुत किया है। इससे गीता का व्यावहारिक और सार्वकालिक स्वरूप उभरकर सामने आता है।
    मोह-माया, अपेक्षाएँ और परिणामों से अत्यधिक आसक्ति को तनाव के मूल कारणों में गिनाना लेख को गहराई देता है। समुद्र की लहरों और स्पीड ब्रेकर जैसे उदाहरण लेखन को रोचक और बोधगम्य बनाते हैं। ये उपमाएँ पाठक को जीवन की वास्तविकताओं को सहज रूप से स्वीकार करना सिखाती हैं।
    अंत में लेखक का यह निष्कर्ष कि तनाव कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक धारणा है, अत्यंत प्रभावशाली है। लोगों के बीच रहने, संवाद करने और सामाजिक जुड़ाव को समाधान के रूप में प्रस्तुत करना लेख को सकारात्मक और आशावादी दृष्टि प्रदान करता है।
    समग्र रूप से, यह लेख न केवल तनाव पर एक विचारोत्तेजक लेख है, बल्कि एक जीवन-दर्शन भी है। यह पाठक को आत्मनिर्भर बनने, अपनी जिम्मेदारी स्वयं लेने और गीता के संदेशों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। सरल भाषा, सशक्त उदाहरण और आध्यात्मिक-व्यावहारिक संतुलन इसे एक प्रभावी और प्रेरक लेख बनाते

  2. श्री वर्मा जी ने वर्तमान समय में मनुष्य की अधिकांश समस्याओं की जड़ “तनाव” पर सारगर्भित स्तम्भ लिखा है। उन्होंने तनाव प्रबंधन के आध्यात्मिक पक्ष को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यथार्थतः तनाव कोई समस्या नहीं, बल्कि मन की धारणा है। हम इसे बाहरी परिस्थितियों का परिणाम मान लेते हैं, जबकि वह मन की आंतरिक अवस्था है। जब समस्या भीतर जन्म लेती है, तो समाधान भी भीतर ही होता है।
    काम का दबाव और तनाव अलग विषय हैं। दबाव जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, पर जब वह मन पर हावी हो जाए, तभी तनाव बनता है। यह प्राथमिकताओं और मानसिक अनुशासन का प्रश्न है। समय की कमी नहीं, समय-प्रबंधन की कमी होती है। श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश स्पष्ट है—”कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” फल की आसक्ति ही तनाव की जड़ है। निष्काम कर्म मन को शांति देता है। सुख-दुःख में समभाव ही योग है। मोह से भय और भय से तनाव जन्म लेता है। गीता जीवन जीने का विज्ञान है। आज संघर्ष बदले हैं पर मन की बेचैनी वही है। तनाव कोई बीमारी नहीं, एक धारणा है और समाधान बाहर नहीं, भीतर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

EN

About Us | Our Team | Privacy Policy | Contact UseMail Login | News Portal Powered by M/s. eHC