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5 thoughts on “रविवारीय: लोकतंत्र और बिहार

  1. बढ़िया आलेख, बिहार की राजनैतिक सच्चाई और वर्तमान जनादेश पर विचारणीय टिप्पणी। बधाई!

  2. बिहार की राजनीति या कहें कि राजनीति की अनिश्चित प्रकृति का सुंदर विवरण, कुछ भी निश्चित नहीं, कुछ भी अनिश्चित नहीं । ये है राजनीति!

  3. Yes Sir,
    Name of my father is Bihari Lal Meena, hence I am feelings proud with images of Bihari

  4. श्री मनीष वर्मा ‘मनु’ का यह आलेख बिहार की लोकतांत्रिक परिपक्वता और सामाजिक चेतना का अत्यंत प्रभावी चित्र प्रस्तुत करता है। आपने संकेतों और उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि इस बार बिहार ने जातीय सीमाओं और भावनात्मक आग्रहों से ऊपर उठकर पूरी व्यावहारिकता के साथ अपना भविष्य चुना है।
    आलेख की भाषा संतुलित है, दृष्टि व्यापक है और संदेश आशावान कि बिहार अब केवल परिणाम नहीं गढ़ रहा, बल्कि देश को लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति भी दिखा रहा है। समग्र रूप से यह आलेख सकारात्मक, गहन और बेहद परिष्कृत रूप में बिहार के बदलते राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य को उजागर करता है।

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