– बृजेश विजयवर्गीय*
पर्यावरणीय जोनों पर बढ़ता दबाव, संरक्षण जरूरी
कोटा/बूंदी: अरावली पर्वतमाला का संरक्षण न किए जाने पर क्षेत्र का टिकाऊ विकास खतरे में है। दुर्लभ मृदा तत्वों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक होड़ ने पर्वतीय और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा दिया है। बूंदी की पहाड़ियों में अवैध खनन, जल स्रोतों का सूखना और वन विनाश जैसी गतिविधियों ने न केवल प्राकृतिक संतुलन को हिला दिया है, बल्कि स्थानीय जीवन, जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को भी गंभीर खतरे में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र में जल संकट, तापमान वृद्धि और जैव विविधता ह्रास जैसी समस्याएं गहराती जाएंगी।

अरावली विरासत बचाओ जन अभियान के तहत बूंदी में आयोजित संवाद बैठक में यह साफ किया गया कि अरावली केवल भूगोल नहीं, बल्कि स्थानीय जीवन-शैली, जैव विविधता और सांस्कृतिक धरोहर का आधार है। बैठक में अभियान से जुड़े लोगों ने बूंदी की पहाड़ियों और फूलसागर क्षेत्र का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और कहा कि इतनी खूबसूरत और ऐतिहासिक भूमि का नष्ट होना चिंता का विषय है। प्रशासन की मौन भूमिका को भी गंभीर प्रश्न के रूप में देखा गया।
बैठक में जोर दिया गया कि अवैध खनन, वन विनाश और जल स्रोतों के सूखने से अरावली पर्वतमाला का अस्तित्व संकट में है। वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी, युवाओं की सक्रियता और व्यापक जागरूकता कार्यक्रमों के बिना अरावली का संरक्षण असंभव है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकास और संरक्षण को विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की परिभाषाओं और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान खनन और निर्माण गतिविधियों से अरावली की पहचान गंभीर खतरे में है।

बैठक में प्रमुख वक्ता पर्यावरणविद नीलम अहलूवालिया थीं, जो चार राज्यों की यात्रा पर थीं। अरावली विरासत बचाओ जन अभियान की सक्रिय सदस्य कुसुम रावत और अंजली श्रेष्ठ, जिला प्रभारी बूंदी विट्ठल सनाढ्य और शाहाबाद घाटी संरक्षण अभियान के प्रतिनिधि प्रशांत पाटनी भी मंचासीन रहे। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय और नागरिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे। इनमें द नाहर संस्था के सचिव संजय खान, गायत्री परिवार बोरखेड़ा के यज्ञदत्त हाड़ा, इंटेक बारां अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा, रोटरी मुक्तिधाम अध्यक्ष के.सी. वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता पुरुषोत्तम पारीक, पूर्व रोटरी अध्यक्ष सी.पी. शेट्टी, युवा साथी सेवा संस्थान के प्रदेशाध्यक्ष विकास पांचाल, आरोह फाउंडेशन के तुलसीराम सैनी, महावीर प्रसाद सैनी, बूंदी खेलकूद विकास समिति अध्यक्ष शक्ति तोषनीवाल, पेंशनर्स मंच महासचिव शंभूदयाल मेहरा, गोपाल दास मेघवाल, रामप्रसाद मीणा, हेल्प इन रिस्क संस्था से हेमंत वैष्णव, पूर्व जिला परिषद सदस्य महेश दाधीच, नाबार्ड बूंदी से उमाशंकर मीणा, पर्यावरण प्रेमी आनंद सनाढ्य, द नाहर संस्था के कोषाध्यक्ष जय सिंह सोलंकी, वरिष्ठ सदस्य सिल्विन क्वॉर्डस, डॉ. श्रीनाथ शर्मा, सागर जैन, पल्लव कुमावत सहित अन्य पर्यावरण प्रेमी शामिल रहे। बैठक का संचालन संजय खान ने किया। उन्होंने कहा कि यह संवाद केवल जागरूकता फैलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत बदलाव की नींव रखने वाला कदम है।
विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा के बिना बूंदी और आसपास के क्षेत्रों में टिकाऊ विकास का सपना अधूरा है। दुर्लभ खनिजों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और स्थानीय विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रशासन, समाज और नीति-निर्माताओं को तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।
*वरिष्ठ पत्रकार
