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– रमेश चंद शर्मा
समझो होली है
पतझड़ अपना रंग दिखाएँ
पेड़ कोपलों से भर जाएँ
नजारा मद- मस्ती फैलाएं
समझो होली है
सेमल फूलों से लद जाएँ
पलाश-टेसू रंग बरसायें
सबकुछ रंगीन नजर आयें
समझों होली है
जब नाचने लगे मन मोर
संगीत फैला हो चारों ओर
ढोलक-ढप का आयें दौर
समझो होली है
बृज-बरसाना मद-मस्तायें
पिटकर भी आदमी मुस्काएं
औरत खुशी से लठ्ठ चलाये
समझो होली है
ठंडाई छन-छन जाएँ
मस्ती अपना रंग दिखाएँ
सभी रिश्ते भूल जाये
समझो होली है
भोला भी बन जाये भूत
सबको मिली रंगने की छूट
कोई किसी से नहीं रहा रूठ
समझो होली है
घर-घर में गुजिया महक फैलाये
गुलाल गालों पर लगने को मचलाए
सबकुछ जवान नजर आये
समझो होली है
ठंडाई पीयें और गुजिया खाएं
फाग गा गा कर खुशी मनाये
फागुन जब सबको बोराए
समझो होली है
दोस्त-दुश्मन का भेद मिट जाये
सभी अपने मित्र बन जाये
सबको मन गले से लगाये
समझो होली है
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