– प्रशांत सिन्हा
हर नागरिक का कर्तव्य: स्वच्छ और हरा-भरा भारत
पर्यावरण बचाकर मजबूत बनाएं हमारा गणतंत्र
26 जनवरी हमारे देश के लिए केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और गौरव का प्रतीक है। आज ही के दिन, स्वतंत्रता के लगभग 2 साल, 11 महीने और 18 दिन बाद, भारतीय संसद ने भारतीय संविधान को पारित कर भारत को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया। तभी से हर वर्ष इसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।
गणतंत्र दिवस केवल संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव नहीं है। यह हमें कर्तव्य और जिम्मेदारी की याद दिलाने का अवसर भी है—विशेषकर हमारे पर्यावरण के प्रति। स्वतंत्रता और अधिकार तब तक वास्तविक नहीं होंगे जब तक हम प्राकृतिक संसाधनों, वनों, नदियों और हवा की रक्षा नहीं करेंगे। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में वृद्धि हमारे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं।
पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसकी अनदेखी करना अपने अस्तित्व के लिए खतरा है। भूमि, जल और वायु जैसे प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग करना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ वातावरण मिल सके।
आमतौर पर हम सरकार से अपेक्षाएं रखते हैं, लेकिन स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेते। यह सच है कि हम व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण के लिए बहुत कुछ नहीं करते और केवल सरकार पर भरोसा करते हैं कि वह हमारे लिए सब संभालेगी। भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इनमें पर्यावरण अदालतों की स्थापना, पर्यावरण हितैषी उत्पादों का प्रमाणीकरण, पेट्रोल को शीशा मुक्त करना, हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध, राष्ट्रीय कूड़ा प्रबंधन परिषद का काम, मोटर वाहनों से प्रदूषण पर निगरानी, सौर ऊर्जा आयोग और सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध जैसी पहलें शामिल हैं। ये सभी कदम सराहनीय हैं, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब हर नागरिक अपनी भूमिका निभाए।
हमारा संविधान भी पर्यावरण संरक्षण को मौलिक कर्तव्य मानता है। अनुच्छेद 48 ए राज्य को निर्देश देता है कि वह पर्यावरण संरक्षण के उपाय सुनिश्चित करे। अनुच्छेद 51 क (ग) नागरिकों को वनों, नदियों, झीलों और वन्य जीवों की रक्षा का दायित्व सौंपता है। यही कारण है कि गणतंत्र दिवस केवल ध्वज और परेड का दिन नहीं, बल्कि हरे संकल्प और पर्यावरणीय जागरूकता का दिन भी है।
इस दिन हर नागरिक छोटे-छोटे कदम उठा सकता है। गणतंत्र दिवस की परेड में हर साल बच्चे और युवा पेड़ लगाने, पौधरोपण अभियान और स्वच्छता कार्यों के संदेश लेकर आते हैं। स्कूलों में छात्र वृक्षारोपण करते हैं, स्थानीय समुदाय गीला और सूखा कचरा अलग करने और सार्वजनिक स्थानों की सफाई में योगदान देता है, जबकि युवा वर्षा जल संचयन और ऊर्जा बचत की छोटी परियोजनाओं में सक्रिय रहते हैं। एक छोटा सा पौधा ही धरती को हरा-भरा बनाए रखने का प्रतीक बन जाता है, और प्लास्टिक का त्याग कर जूट या कपड़े के थैले का प्रयोग करना, घर और स्कूल में ऊर्जा बचत करना, ये सभी छोटे कदम सामूहिक रूप से बड़े बदलाव लाते हैं।
जब हम नदियों को स्वच्छ रखते हैं, वनों की कटाई रोकते हैं और जैविक खेती को बढ़ावा देते हैं, तो हम न केवल अपना भविष्य सुरक्षित करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और जल का उपहार भी देते हैं। यह हरा संकल्प व्यक्तिगत प्रयास से सामूहिक परिवर्तन की दिशा में सबसे मजबूत कदम है।
गणतंत्र की वास्तविक सार्थकता तभी होगी जब प्रत्येक नागरिक को काम, भोजन और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित हो। हमारे अधिकार तभी सुरक्षित हैं जब हम अपने कर्तव्य का पालन करें। इस गणतंत्र को मजबूत बनाने का सबसे सशक्त तरीका है कि हम इसे हरियाली, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाएँ।
26 जनवरी पर यह संकल्प लें—अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्य का पालन करें और पर्यावरण की रक्षा करें। यह हरा संकल्प न केवल हमारे देश को मजबूत बनाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जीवनदायिनी बनेगा।
