– रमेश चंद शर्मा समझो होली है पतझड़ अपना रंग दिखाएँ पेड़ कोपलों से भर जाएँ नजारा...
कविता
– रमेश चंद शर्मा गंगा कल, आज और कल पहले की सुन लो मेरी बात सभी चाहे...
– रमेश चंद शर्मा दयासागर, करुणामय राम एक राम दशरथ का बेटा एक राम धरती में लेटा...
