संस्कृति संग रंगों का भोजपुरिया उत्सव
बंगलौर में जुटेगा भोजपुरी समाज 4 मार्च
बंगलौर: बंगलौर में बसे भोजपुरी समाज के लोग हर साल होली के अवसर पर एक ऐसा आयोजन करते हैं, जो केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहने का माध्यम बन जाता है। इसी क्रम में भोजपुरी समाज सेवा समिति (रजिस्टर्ड), बंगलौर 4 मार्च 2026 को अपना 16वां होली मिलन समारोह आयोजित करने जा रही है।
समिति के इंदिरा नगर स्थित प्रधान कार्यालय में हाल ही में आयोजित विशेष बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि होली मिलन समारोह कारपोरेशन स्कूल, बनारपेट, विवेक नगर, बंगलौर के प्रांगण में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम प्रातः 10 बजे आरंभ होगा और दोपहर के भोजन के उपरांत शाम 4 बजे संपन्न होगा।

समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं चेयरमैन संजय सिंह उज्जैन ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी समारोह हर्षोल्लास के साथ, किंतु अनुशासित और सुनियोजित ढंग से आयोजित किया जाएगा। बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग और पुरुष सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि समारोह में मादक पदार्थों का उपयोग पूर्णतः वर्जित रहेगा और कोई भी व्यक्ति नशे की अवस्था में शामिल नहीं हो सकेगा। रंगों के स्थान पर केवल समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राकृतिक गुलाल का उपयोग किया जाएगा, जो मुल्तानी मिट्टी, चंदन और गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार किया गया है, साथ ही फूलों से होली खेली जाएगी।
इस वर्ष आयोजन की जिम्मेदारी श्रीमती किरण पटेल को सौंपी गई है, जो समारोह की अध्यक्ष होंगी। उनकी अध्यक्षता में गठित पाँच सदस्यीय टीम में श्रीमती बेबी सिंह को उपाध्यक्ष, संजय भारती को मुख्य व्यवस्थापक तथा पुष्कर कुमार उर्फ मोनू और शिवशंकर सिंह को व्यवस्थापक नियुक्त किया गया है।
श्रीमती किरण पटेल ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से होगी और इसके साथ केक कटिंग का आयोजन भी किया जाएगा। मार्च माह में जिन सदस्यों का जन्मदिवस या वैवाहिक वर्षगांठ है, उन्हें इस अवसर पर शुभकामनाएँ दी जाएँगी। व्यवस्थापक पुष्कर कुमार ने जानकारी दी कि इस बार होली के अवसर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
समिति के सचिव गिरीश चंद्र पाण्डेय ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह आयोजन न केवल होली के उत्सव का सामूहिक रूप है, बल्कि बंगलौर जैसे महानगर में बसे भोजपुरी समाज के सदस्यों को एक मंच पर लाने और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का अवसर भी है।
महानगरीय परिवेश में अपनी भाषा और परंपरा को सहेजते हुए सामुदायिक उत्सव को अनुशासन, पर्यावरण-सचेत दृष्टिकोण और पारिवारिक सहभागिता के साथ मनाने की यह पहल स्थानीय स्तर पर एक संगठित सांस्कृतिक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
-ग्लोबल बिहारी ब्यूरो
